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चलती हुई रेहड़ी पर सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख फैसले।



चलती हुई रेहड़ी पर सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख फैसले
1. Sodan Singh एवं अन्य बनाम New Delhi Municipal Committee
फैसले की तारीख: 30 अगस्त 1989
Citation: (1989) 4 SCC 155
पीठ: सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ
महत्वपूर्ण पैराग्राफ: पैरा 17
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमते हुए सामान बेचने वाले फेरीवाले का व्यापार करने का अधिकार लंबे समय से मान्य है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के अंतर्गत आता है। हालांकि सार्वजनिक सुविधा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और यातायात के लिए इसका उचित विनियमन किया जा सकता है। इस फैसले का संबंधित अंश बाद के सुप्रीम कोर्ट निर्णय में भी ज्यों का त्यों दर्ज है।
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2. Gainda Ram एवं अन्य बनाम Municipal Corporation of Delhi
फैसले की तारीख: 8 अक्टूबर 2010
Citation: (2010) 10 SCC 715
महत्वपूर्ण पैराग्राफ: पैरा 8, 46 और 77–79
इसमें सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा स्पष्ट किया कि चलते-फिरते हुए व्यापार करने वाले हॉकर का अधिकार मान्य है और उचित कानूनी विनियमन के बिना इस अधिकार को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 19(1)(g) के अधिकार पर प्रतिबंध केवल वैधानिक कानून के माध्यम से लगाया जा सकता है, केवल विभागीय आदेश से नहीं।
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सुप्रीम कोर्ट का आधिकारिक पूरा फैसला:
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3. Maharashtra Ekta Hawkers Union बनाम Municipal Corporation, Greater Mumbai
फैसले की तारीख: 9 सितंबर 2013
केस: Civil Appeal Nos. 4156–4157 of 2002
Citation: (2014) 1 SCC 490
इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने “मोबाइल हॉकर” को ऐसा विक्रेता माना जो ठेला, रेहड़ी या टोकरी लेकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाता है। फैसले में कहा गया कि मोबाइल वेंडिंग सामान्यतः अनुमत होनी चाहिए, सिवाय उन क्षेत्रों के जिन्हें उचित प्रक्रिया से नो-वेंडिंग जोन घोषित किया गया हो। �
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अदालत ने उस समय यह निर्देश भी दिया था कि सर्वेक्षण, पंजीकरण और वेंडिंग जोन बनाने की प्रक्रिया पूरी होने तक देश में पहले से काम कर रहे स्ट्रीट वेंडरों को काम करने दिया जाए। यह अंतरिम व्यवस्था बाद में Street Vendors Act, 2014 लागू होने तक थी।

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