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उत्तर प्रदेश साइबर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, पीड़िता का आरोप—न फोन उठ रहा, न ई-मेल का मिला जवाब


उत्तर प्रदेश साइबर पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, पीड़िता का आरोप—न फोन उठ रहा, न ई-मेल का मिला जवाब
लखनऊ। उत्तर प्रदेश साइबर क्राइम पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। GSL TV NEWS Channel की डिप्टी डायरेक्टर शिखा जैन ने आरोप लगाया है कि साइबर क्राइम से जुड़ी शिकायत के समाधान के लिए उन्होंने कई दिनों तक संबंधित अधिकारियों से लगातार संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन न तो फोन कॉल का जवाब मिला और न ही ई-मेल का कोई उत्तर प्राप्त हुआ।

पीड़िता के अनुसार उन्होंने साइबर क्राइम के अधिकारियों और थाना प्रभारी (SHO) से संपर्क करने के लिए 9454400581 और 7839876640 नंबरों पर लगातार कॉल किए, लेकिन किसी भी कॉल का जवाब नहीं मिला। इसके अतिरिक्त उन्होंने gsltvnewschannel@gmail.com से sp-cyber.lu@up.gov.in पर विस्तृत ई-मेल भी भेजा, लेकिन कई दिनों बाद भी कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ।

शिखा जैन का आरोप है कि उनके मोबाइल नंबर का सिम कार्ड अचानक बंद कर दिया गया। उनका दावा है कि मोबाइल सेवा प्रदाताओं की ओर से उन्हें बताया गया कि सिम उत्तर प्रदेश पुलिस के निर्देश पर ब्लॉक किया गया है। वहीं, उनका यह भी कहना है कि जब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी मांगी तो उन्हें स्पष्ट उत्तर नहीं मिला और न ही लिखित रूप से कोई स्पष्टीकरण दिया गया।

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि कई निर्दोष लोगों के मोबाइल नंबर बिना पर्याप्त जानकारी दिए बंद कर दिए जाते हैं। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति पर यूपीआई फ्रॉड या अन्य साइबर अपराध का संदेह है, तो संबंधित व्यक्ति को उचित सूचना, साक्ष्य और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। बिना स्पष्ट कारण बताए मोबाइल सेवाएं बंद कर देना आम नागरिकों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है।

शिखा जैन ने प्रश्न उठाया कि यदि साइबर क्राइम थानों और अधिकारियों से समय पर संपर्क ही न हो सके, फोन कॉल का जवाब न मिले और ई-मेल का भी कोई उत्तर न आए, तो आम नागरिक अपनी समस्या लेकर आखिर कहां जाए? उनका कहना है कि ऐसी स्थिति से लोगों का विश्वास व्यवस्था पर कमजोर होता है।

यह उल्लेखनीय है कि इस मामले में लगाए गए सभी आरोप पीड़िता के दावे पर आधारित हैं। संबंधित विभाग की ओर से अभी तक इस विषय में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि उत्तर प्रदेश पुलिस या संबंधित अधिकारी इस मामले में अपना पक्ष प्रस्तुत करते हैं, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

जनता की मांग

– साइबर शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
– अधिकारियों द्वारा हेल्पलाइन नंबरों पर कॉल का उत्तर दिया जाए।
– ई-मेल शिकायतों का निर्धारित समय सीमा में जवाब दिया जाए।
– यदि किसी मोबाइल नंबर या सिम कार्ड पर कार्रवाई की जाती है तो संबंधित व्यक्ति को उसका स्पष्ट कारण और लिखित सूचना उपलब्ध कराई जाए।
– शिकायतों की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाए।

साइबर अपराध से निपटने के लिए बनाए गए तंत्र का उद्देश्य आम नागरिकों को सुरक्षा और न्याय प्रदान करना है। यदि शिकायतकर्ताओं को ही समय पर सुनवाई न मिले, तो व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए त्वरित कदम उठाने चाहिए।

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